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जानें बड़ी-बड़ी कंपनियां दिल्ली-एनसीआर को छोड़कर इन शहरों में क्यों करना चाहती है अपना बिजनेस

Delhi-NCR Update : आपको बता दें दिल्ली -एनसीआर में सबसे ज्यादा कंपनियां अपना बिजनेस या ऑफिस शुरू करती है लेकिन मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि ऑफिस स्पेस के मामले में दिल्ली-एनसीआर सही जगह नही क्योंकि वहां पर स्पेस बहुत ही कम लेकिन आज हम भारत के ऐसे तीन प्रमुख शहरों के बारे में बतायेंगे जिसमे आप बड़ी-बड़ी कंपनियां खोल सकते है आइए जानते है खबर में इन 3 शहरों के बारे में-
 
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जानें बड़ी-बड़ी कंपनियां दिल्ली-एनसीआर को छोड़कर इन शहरों में क्यों करना चाहती है अपना बिजनेस 

HARYANA NEWS HUB : दिल्ली -एनसीआर में सबसे ज्यादा कंपनियां अपना बिजनेस या ऑफिस शुरू करती है लेकिन मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है ऑफिस स्पेस के डिमांड के मामले में दिल्ली एनसीआर (Delhi NCR) या उत्तर भारतीय शहर फिसल रहे हैं आइए जानते है खबर में इससे जुड़ी और अधिक जानकारी-
कम से कम वेस्टियन (Vestian) की रिपोर्ट से तो ऐसा ही लग रहा है। बेंगलुरु की रियल एस्टेट कंसलटेंट कंपनी वेस्टियन ने चालू वर्ष की पहली तिमाही के लिए एक रिपोर्ट जारी किया है।

इसमें इस दौरान लीज पर लिए गए ऑफिस स्पेस के बारे में जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि ऑफिस स्पेस के मामले में भारत के तीन प्रमुख दक्षिणी शहर बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद देश के अन्य शहरों पर भारी रहे हैं। इन तीनों शहरों का हिस्सा 59% रहा है।

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ऑफिस लीज का कारोबार मंदा:

'वेस्टियन' ने अपनी त्रैमासिक ऑफिस मार्किट रिपोर्ट 'द कनेक्टQ2 2023' में बताया है कि इस साल अप्रैल से जून की तिमाही में कुल 13.9 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज पर लिए गए।

इनमें तीन प्रमुख दक्षिणी शहरों की हिस्सेदारी 8.2 मिलियन वर्ग फुट रही। यदि पूरे देश के आंकड़े देखें तो इस साल ऑफिस लीज का कारोबार मंदा है।

पिछले साल इसी तिमाही में 14.8 मिलियन वर्ग फुट स्पेस लीज पर लिया गया था। इस साल यह छह फीसदी घट कर 13.9 मिलियन वर्ग फुट रह गया है।

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क्या कारण हैं मंदे कारोबार का:

वेस्टियन के सीईओश्रीनिवास राव का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बड़ी घरेलू कंपनियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा निर्णय लेने में देरी के कारण आलोच्य अवधि में कम स्पेस लीज पर लिए गए हैं।


हालांकि उनका कहना है कि पिछली तिमाही के मुकाबले इस तिमाही मांग सुधरी है और इसमें 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उनका कहना है कि प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छा कर रही है।

वित्त वर्ष 2023 की अंतिम तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर में सुधार देखा गया है। वित्तीय बाजारों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जो देश में व्याप्त सकारात्मक भावना को दर्शाता है।


सुधार के संकेत:

राव ने कहा कि पिछली तिमाही की तुलना में जून तिमाही के दौरान पट्टे लेने और पूर्ण निर्मित जगह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनका कहना है कि इंजीनियरिंग और मैन्यूफेक्चरिंग के बाद टेक्नोलोजी क्षेत्र में लीज की गतिविधियों सबसे ज्यादा रहीं।

उनका कहना है कि जैसे-जैसे वैश्विक बाजार स्थिर होंगे, साल की दूसरी छमाही के दौरान देश भर में रियल एस्टेट गतिविधियों में वृद्धि की उम्मीद है।

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अप्रैल-जून 2024 बनाम अप्रैल-जून 2023:

चेन्नई में पट्टे पर ली गई जगह में 83% की वृद्धि देखी गई, जोकि 1.2 मिलियन वर्ग फीट से बढ़कर 2.2 मिलियन वर्ग फीट हो गई।

बेंगलुरु में पट्टे 4.2 मिलियन वर्ग फीट से 12% कम 3.7 मिलियन वर्ग फीट ही लिए गये।

हैदराबाद में पट्टे की गतिविधि 2.4 मिलियन वर्ग फुट से 4 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 2.3 मिलियन वर्ग फुट पर आ गई।

महाराष्ट्र के दो प्रमुख ऑफिस मार्केटों में से मुंबई में पट्टे 2.4 मिलियन वर्ग फीट से 25% कम 1.8 मिलियन वर्ग फीट ही लिए गये।

लेकिन पुणे में मांग 1.7 मिलियन वर्ग फुट से 6 प्रतिशत बढ़कर 1.8 मिलियन वर्ग फुट हो गई।

दिल्ली-एनसीआर में ऑफिस के पट्टे में नरमी रही, और 2.1 मिलियन वर्ग फीट से 5 प्रतिशत गिरकर 2 मिलियन वर्ग फीट रह गई।

कोलकाता में, पट्टे की गतिविधियां 0.8 मिलियन वर्ग फुट से 88% गिरकर 0.1 मिलियन वर्ग फुट पर आ गईं।

प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने जून तिमाही में 26 प्रतिशत की उच्चतम बाजार हिस्सेदारी हासिल करते हुए पट्टे की गतिविधियों में एक प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज की।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र की पट्टे की गतिविधि में 19% हिस्सेदारी है, वहीं फ्लेक्सस्पेस ने 18 % की सम्मानजनक हिस्सेदारी हासिल की है।